राधा जी को अनादि शक्ति कहा गया है — वे कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति (आनंद स्वरूप) हैं।
राधा, भगवान कृष्ण की सबसे प्रिय सखी और शक्ति थीं। वे प्रेम और भक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
राधाष्टमी , कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आती है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।
राधा रानी का जन्म मथुरा के पास स्थित बरसाना में हुआ था। आज भी यहाँ का राधा रानी मंदिर भक्तों के लिए सबसे पवित्र स्थान है।
सनातन धर्म में माना जाता है कि कृष्ण की पूजा बिना राधा के अधूरी है। इसी वजह से \\\'जय श्री कृष्ण\\\' के बजाय \\\'जय श्री राधे-कृष्ण\\\' बोला जाता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
इस दिन मंदिरों को सजाया जाता है, राधा रानी की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। फिर उन्हें नए वस्त्र पहनाकर झूले में बैठाया जाता है।
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